दोनों किडनी खराब होने पर आदमी कितना दिन जिंदा रह सकता है

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दोनों किडनी खराब होने पर आदमी कितना दिन जिंदा रह सकता है: एक विस्तार से जानकारी

दोनों किडनी खराब होने पर आदमी कितना दिन जिंदा रह सकता है : Introduction

आजकल की बदलती लाइफस्टाइल और खानपान के कारण किडनी समस्याएँ आम हो गई हैं। इसके कारण कई लोगों को सवाल होता है – दोनों किडनी खराब होने पर आदमी कितना दिन जिंदा रह सकता है? यह जानकारी हमारे स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक प्रयास है। इस लेख में हम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे और आपको उपयोगी जानकारी प्रदान करेंगे।

दोनों किडनी खराब होने पर आदमी कितना दिन जिंदा रह सकता है : दोनों किडनी खराब होने के कारण

दोनों किडनीयों के खराब होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

  1. डायलिसिस के बाद की स्थितियाँ (पोस्ट-डायलिसिस आवश्यकता): किडनी रोगी जो लंबे समय तक डायलिसिस का इलाज करते हैं, उनकी किडनीयों की स्थिति और फिल्ट्रेशन क्षमता दीर्घकालिक डायलिसिस के परिणामस्वरूप अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती हैं।
  2. डायबीटीज़: डायबीटीज़ के मरीज़ों में उच्च रक्त शर्करा स्तर द्वारा किडनीयों को क्षति हो सकती है, जिससे उनकी सहायक किडनीयाँ भी प्रभावित हो सकती हैं।
  3. उच्च रक्तचाप: उच्च रक्तचाप किडनीयों के लिए हानिकारक हो सकता है और दीर्घकालिक उच्च रक्तचाप किडनीयों के अंग का नुकसान कर सकता है।
  4. ज्यादा दवाएँ खाना: अधिक मात्रा में बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएँ खाना भी किडनीयों को प्रभावित कर सकता है।
  5. पथरी: बड़े पथरी किडनी में आकर उन्हें अवरोधित कर सकते हैं और किडनीयों के क्षति का कारण बन सकते हैं।
  6. अनियमित जीवनशैली: अनियमित आहार, व्यायाम की कमी, तंबाकू और शराब का सेवन, और अन्य अनियमित जीवनशैली की वजह से भी किडनीयों की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
  7. आदर्श की अनुपालन: किडनी रोगियों को डॉक्टर की सलाह के बिना आदर्श और आपातकालीन उपचार अनुपालन करना भी उनकी स्थिति को खतरनाक बना सकता है।

 

दोनों किडनी खराब होने पर आदमी कितना दिन जिंदा रह सकता है : किडनी समस्याओं के लक्षण

किडनी समस्याएँ विभिन्न लक्षणों के साथ प्रकट हो सकती हैं, जो किडनी के किसी अवस्था की सूचित कर सकते हैं। यहाँ कुछ आम किडनी समस्याओं के लक्षण दिए गए हैं:

  1. मूत्र संबंधित लक्षण:
    • पेशाब में जलन या दर्द
    • पेशाब करते समय आंखों, पैरों या हाथों में सूजन
    • पेशाब के साथ खून आना
    • बार-बार पेशाब की इच्छा होना लेकिन कम मात्रा में पेशाब आना
  2. नियमितता की समस्याएँ:
    • नियमितता में बदलाव, जैसे कि अचानक बहुत ज्यादा पेशाब आना
    • पेशाब में सुरक्षित रूप से नियंत्रण नहीं होना
  3. मूत्रमार्ग संक्रमण:
    • पेशाब करते समय जलन या दर्द
    • तेज आवाज़ या दर्द के साथ पेशाब करना
    • पेशाब में बदलाव, जैसे कि रंग और गंध में परिवर्तन
  4. शारीरिक लक्षण:
    • स्थायी या आकार में बढ़ जाने वाली सूजन
    • चेहरे, हाथों, पैरों, या आंखों में सूजन
  5. थकान और नींद की समस्याएँ:
    • अचानक थकान और कमजोरी का अहसास
    • प्राकृतिक रूप से नींद नहीं आना या बार-बार जागना
  6. रक्तचाप की समस्याएँ:
    • उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) या निम्न रक्तचाप (हाइपोटेंशन)
    • चक्कर आना, मतली, उलटी या सिर दर्द
  7. बौनापन या खानपान संबंधित समस्याएँ:
    • बौनापन या भूख कम लगना
    • पेट में बढ़ी हुई या दर्दभरी अनुभूति
  8. एनीमिया या कमजोरी: किडनी समस्याएँ एनीमिया के कारण हो सकती हैं, जिसमें खून में हेमोग्लोबिन की कमी होती है।
  9. पेशाब की संवादिता में बदलाव: किडनी समस्याओं में पेशाब की संवादिता में बदलाव हो सकता है, जैसे कि अधिक पेशाब करने की आवश्यकता होना या कम पेशाब करने की आवश्यकता होना।

 

दोनों किडनी खराब होने पर जीवनकाल

जब दोनों किडनीयाँ खराब हो जाती हैं, तो व्यक्ति की स्थिति गंभीर हो जाती है और उसके जीवनकाल पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। दोनों किडनीयाँ खराब होने के बाद विकलांगता (किडनी संक्रमण, डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट के परिणामस्वरूप) के साथ अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

  1. डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट: जब दोनों किडनीयाँ खराब हो जाती हैं, तो डायलिसिस (किडनी की प्रतिसारण प्रक्रिया) की आवश्यकता हो सकती है। यह व्यक्ति के लिए नियमित मात्रा में किया जाता है ताकि शरीर में अवशिष्ट अपशिष्टों को निकाला जा सके। विकलांगता के दौरान डायलिसिस करना या किडनी ट्रांसप्लांट करवाना स्थायी या अस्थायी तरीके से जीवनकाल के प्रबंधन को सामना करने की आवश्यकता पैदा कर सकता है।
  2. जीवनशैली परिवर्तन: जब दोनों किडनीयाँ खराब होती हैं, तो व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में भी परिवर्तन करने की आवश्यकता होती है। यह आहार, पानी पीने की मात्रा, व्यायाम, और विशेष ध्यान आदि को शामिल कर सकता है।
  3. मानसिक चुनौतियाँ: दोनों किडनीयाँ खराब होने के बाद, व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है। यह स्थायी या अस्थायी तरीके से तनाव, डिप्रेशन, और अन्य मानसिक समस्याओं का कारण बन सकता है।
  4. सोशल और व्यक्तिगत संबंध: विकलांगता के साथ, सामाजिक और परिवारिक संबंधों में भी बदलाव हो सकता है। समर्थन, समझदारी और स्नेह से यह मुश्किल समय आसान बन सकता है।

 

FAQs

Q: क्या दोनों किडनी की समस्या होने पर ट्रांसप्लांट का विकल्प होता है? A: जी हां, यदि किडनी की स्थिति गंभीर है और उपचार से सुधार नहीं हो सकता, तो किडनी ट्रांसप्लांट का विकल्प उपलब्ध होता है।

Q: क्या किडनी समस्याओं को बचाने के लिए कुछ खास सावधानियाँ हैं? A: हां, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल करने, और उपयुक्त खानपान का पालन करने से किडनी समस्याओं को बचाया जा सकता है।

Q: क्या किडनी समस्याएँ आंखों के रंग पर प्रभाव डाल सकती हैं? A: हां, किडनी समस्याएँ आंखों के रंग पर भी प्रभाव डाल सकती हैं, जिससे आंखों की सफेदियाँ पीली हो सकती हैं।

निष्कर्षण

दोनों किडनी खराब होने पर आदमी कितना दिन जिंदा रह सकता है, यह वाकई व्यक्ति के उपचार, स्वास्थ्य, और उम्र पर निर्भर करता है। समय पर उपचार और स्वस्थ जीवनशैली का पालन करके हम अपने किडनी की सेवा कर सकते हैं और उन्हें स्वस्थ रख सकते हैं।

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